हमारे देश में आप तब तक एक
अच्छे पत्रकार, फिल्मकार, कलाकार नहीं हो जबतक आप वामपंथी विचारधारा को स्वीकार
नहीं लेते | जब वामपंथी बनना इतना ही जरूरी है बेवजह हर जगह हर बात पर तो क्योँ
नहीं दुसरे के बाप को अपना बाप कहते हो, इससे तुम और ज्यादा वामपंथी हो जाओगे |(
यह एकमात्र व्यंग्य है )
जिस तरह अफ़्रीकी ऊनी कपड़ा
अपने गर्म प्रदेश में और यूरोपियन सूती
कपडे अपने सर्द प्रदेश में नहीं पहनते| ठीक उसी तरह एक ही तरह की शासन तंत्र
प्रणाली(system of government) को हर जगह थोपा नहीं जा सकता | जहाँ तक वामपंथ की
बात है , हमारे देश का बुद्धिज़्म संस्करण कही ज्यादा बेहतर है कार्ल मार्क्स के
साम्यवाद संस्करण से | हमारे देश में पुराने समय में भी वामपंथी रहे है | गौतम
बुद्ध, शंकराचार्य , दयानंद सरस्वती आदि कुछ उदहारण हो सकते है ऐसे वामपंथ(
leftism) का |
जिस तरह अमेरिका में
साम्यवाद, नार्थ कोरिया-क्यूबा-चीन में
पूँजीवाद और अरब देशों में लोकतंत्र को नहीं थोपा जा सकता अभी | उसी तरह इस देश
में मार्क्सवाद के देशी संस्करण नक्सलवाद-माओवाद भी अवांक्षित है , इस देश के लिए
| इस देश को एक नए शासन तंत्र प्रणाली (new type of SOG) की आज भी तलाश है, जो इसके
अनुसार सही हो |
[ कोई भी वाद हो , यदि वो
हक़ की बात करता हो | भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को सबको
उपलब्धता की बात करता हो ,तो वो हमें स्वीकार्य होना चाहिए | पर जब ये एक नए
शासन तंत्र प्रणाली ( SOG) की बात करे और वो साम्यवाद (मार्क्सिस्ट कम्युनिज्म)
आधारित हो जो कही भी किसी का भला न कर सका
चाहे वो सोवियत रूस हो या नार्थ कोरिया | तब हमें ऐसा तंत्र स्वीकार्य नहीं और ऐसे
शासन तंत्र व्यवस्था का बहिष्कार होना चाहिए | ]