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Wednesday, December 29, 2010

हमें अपनी मानसिकता बदलनी ही होगी

ये एक आदत सी हो गयी है हमें किसी भी बात के लिए दुसरे को दोषी ठहराना | किसी भी बात पर हम बोलते है जो हो रहा है होने दो |जबकि उनको अछि तरह से मालूम होता है की जो भ्रस्टाचार  हो रहा है --वह किसी न किसी तरह से उन्हें दुष्प्रभावित  करेगा ही |
हमेशा हम बोलते है : मै क्या कर सकता हूँ ,,मै क्या कर सकता हूँ | मै पूछता हूँ ये मै, मै मिलकर ही तो "हम" बनता है ; इसी तरह ही बोलते रहे तो एक दिन सच मे ही हम कुछ करने लायक नहीं रह पाएंगे | और इस तरह देश को दुर्गति की और ले जाने के लिए हम ही जिम्मेवार होंगे|

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