आज गणतंत्र दिवस है | सबसे पहले आप सबको ६२ वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई हो |हमें फक्र है की हम सबसे बड़े लोकतंत्र मे रहते हैं ,क्योंकि हमारी लोकशक्ति दुनिया मे अधिक है न | सबको पता है इस गणतंत्र दिवस पर भी कुछ नया आज नहीं होने वाला है | राष्ट्रपति ध्वजारोहण करके खानापूर्ति कर देंगी , और कुछ लोग भाषण देकर अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड लेंगे |मुझे रह-रह के एक बात चैन नहीं लेने नहीं दे रही है | इस गणतंत्र दिवस पर जरा गौर फरमाइए | हमारे जिम्मेवार और बुजुर्ग लोग संसद और उंच्च-न्यायालय मे संविधान का मजाक उड़ाते है | हमेशा संविधान की कोई कमी को सही करने के बजाए उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल... करते है--,,---और हम युवा और आमलोगों से आशा करते है की हम अपने संविधान मे विश्वास और निष्ठा बनाये रखेंगे ,,ये क्या मजाक आज हमारे देश मे हो रहा है. मुझे तो जरा भी कुछ समझ मे नहीं आ रहा है | हमें तो एक गधे से भी ज्यादा यहाँ बेवक़ूफ़ बनाया जाता है, जिसे बोला जाता हो सुखी घांस खाओ सेहतमंद रहोगे और खुद हरी घांस के चक्कर मे हमेशा पड़े रहते हैं|
कुछ संविधान की अवमानना या तिरस्कार हमारी सरकार या कुछ जिम्मेवार लोगो ने किया है, जिसपर हमें गौर करना होगा |इन्होने ऐसा करके देश के सामने एक ऐसा उदहारण पेश किया है की कोई भी चाह के भी संविधान के प्रति निष्ठा नहीं रख सकता | इन्होने समूचे कानून -तंत्र और संविधान पर ही प्रश्नचिंह लगा दिया है| वे मुद्दे हैं या कहिये उनमे से कुछ इस प्रकार हैं:---

- सर्वोच्य अदालत के फैसले के बावजूद अफजल गुरु को फांसी नहीं दिया गया| और तो और उसे बचने की भी कोशिस की गयी , चन्द फायदे के लिए सतारूढ़ दल द्वारा | संविधान की कमी का फयदा उठाया गया यहाँ अपने फायदे के लिए , और सर्वोच्य -अदालत के फैसले का तिरस्कार करते हुए ये मामला राष्ट्रपति के सामने लंबित कर दिया गया | आश्चर्य ये मामला आज भी लंबित ही है | इससे समाज मे क्या सन्देश गया | क्या इससे संविधान के प्रति हमारा आदर मे इजाफा हो गया ! , कतई नहीं बल्कि हममे संविधान के प्रति नफरत ही पैदा हो गया | यहाँ संविधान की कमी को सुधारने के बजाय अपने स्वार्थ के लिए संविधान और क़ानून का फायदा उठाया गया |
- फांसी देने मे भी असमानता जो की हमारे "समानता के अधिकार का उल्लंघन " करता है | उदहारण सामने है धनञ्जय चटर्जी को फाँसी दे दी गयी पर निठारी कांड के अभियुक्त दानव के साथ क्या किया गया !
- जेसिका लाल हत्याकांड हो या उज्जैन की विदेसी युवती के साथ बलात्कार की घटना
ये ,ऐसे बहुत से उदहारण है जहाँ पर सरकार ,न्यायालय ,और पुलिस इतनी सख्त नहीं हुई थी
जितनी की धननंजय चटर्जी के वक़्त हुई थी | ये मामला भी राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के पास गया था | उसके माँ बाप पैर पकड़कर राष्ट्रपति से रो-रो के बोले थे सिर्फ फांसी के बजाय आजीवन उम्रकैद दे दिया जाये | उस समय राष्ट्रपति महोदय का दिल नहीं पिघला या मानवाधिकार वालें उस वक़्त सो रहे थे | क्या इसीलिए की वो गरीब था पहुंचवाला नहीं था |ये भेदभाव किस अधार पर था पता नहीं पर ऐसे घटनाओं ने समानता का अधिकार पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है ???ये सही है की ये अधिकार नहीं है पर सजा मे तो सबके लिए समानता बरतनी चाहिए जो
हमारा संविधान मे लिखा गया है ,कानून तो किसी के साथ भेदभाव नहीं करता पर यहाँ क्या किया है क़ानून ने ??????? - सूचना का अधिकार तो है हमारे पास पर हमें ये कहकर नहीं दिया जाता की ये देशहित मे नहीं है, जबकि ये सूचना हमें देशहित के ही लिए चाहिए होती है | देश की सुरक्षा से सम्बंधित सूचनाओ को तो दे दिया जाता है, जिससे की दुश्मन हमारे कमी का फयदा उठा ले,पर स्वित्ज़रलैंड की सरकार द्वारा मुहैय्या कराइ गए आंकडे सार्वजनिक नहीं किये जा रहे ,जिससे हमें पता चल सके कौन कितना भ्रष्ट है|ये मुझे थोडा सा भी समझ मे नहीं आया की भ्रष्ट लोगों की शिनाख्त कर लेने से देशहित को कौन सा खतरा है,जिसकी वजह से सूचनाये मुहैय्या नहीं कराइ जा रही | कहीं ऐसा तो नहीं है न की जो जिम्मेवार मंत्री जी है वे भी इसमे फंस सकते है,या इंतेज़ार किया जा रहा है फेरबदलकर के इसमे भी भ्रस्टाचार का ||
- आरक्षण --संविधान तैयार करते समय प्रवधान किया गया था की आरक्षण १० साल के लिए ही है केवल ,पर ये तो आजतक भी है |इससे आरक्षण लेने वालों को भी परेशानी हो रही है ,वे नहीं चाहते की वे आरक्षण की बदौलत कामयाब हो ,तो फिर ये आरक्षण आज भी क्यों|संविधान बनाते समय ज्यादा से ज्यादा ५०% आरक्षण की बात की गयी थी और यही बिल मे भी पास हुआ पर आज तमिलनाडु मे आरक्षण ६७% है जो की हमारे संविधान की अवमानना करता है |यहाँ अल्पसंख्यकों को भी आरक्षण देने का प्रवधान किया गया है जो की गलत है,- धार्मिक आधार पर भेदभाव करने के अंतर्गत , पर यहाँ ये कैसे हो गया और ५०% का आंकड़ा आरक्षण को जो की कुलमिलाकर ज्यादा से ज्यादा होना चाहिए, इसका उल्लंघन यहाँ क्यों हो रहा है| राजनीतिक दलों द्वारा कुछ वोट के लालच के लिए आसानी से संविधान का उल्लंघन कर दिया जाता है जिससे देश की आत्मा मे एक रोग पनपता है | और भी कई राज्य इसके उदहरण है जिनमे बिहार हाल-फ़िलहाल शामिल हुआ है जहाँ कभी कभार देखने को मिल जाता है की राज्य की नौकरिओं मे आरक्षण का कुल आंकड़ा ५०% भी पर कर जाता है |
- यदि ये ऐसे ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हमारे संविधान का भी हश्र कुछ उसी तरह का होगा जिस तरह का हस्र आंबेडकर ने मनुसंहिता के साथ किया था |,..............................
- ऐसा नहीं है की मै राष्ट्रभक्त नहीं हूँ | मै एक सच्चा देशभक्त हूँ , पर ऐसा बोलना यहाँ तार्किक होगा की मुझे इस संविधान मे विश्वास अब नहीं रह गया है | प्रायोगिक तौर पे तो लगभग सभी लोग ऐसा ही करते है , आज ऐसी ही सोच रखने लगे हैं; आज अपनी संविधान के प्रति | समाज ने भी तो मान्यता दे ही दिया है तभी तो जो जितना झूठा है और कानून की कमिओं का फायदा उठाना कोई जानता है और उसे अपने हक मे इस्तेमाल करना जनता है वो ही आज बड़ा वकील बनता है,व्यापारी और नेता बनता है | इ.........SOME CONTENTS HAS BEEN DELETED DUE TO SOME REASON....12/06/2015.














